दिल को छूने वाली उदास शायरी

पाँवों के लड़खड़ाने पे तो सबकी है नजर, सर पे कितना बोझ है कोई देखता नहीं।

फूल बनने की खुशी में मुस्कुरायी थी कली, क्या खबर थी ये तबस्सुम मौत का पैगाम है।

बेहतर दिनों की आस लगाते हुए हबीब, हम बेहतरीन दिन भी गंवाते चले गए।

कट गया पेड़ मगर ताल्लुक की बात थी, बैठे रहे ज़मीन पर वो परिंदे रात भर।

दो शब्द तसल्ली के नहीं मिलते इस शहर में, लोग दिल में भी दिमाग लिए घूमते हैं।

हजारों जवाब से अच्छी मेरी खामोशी, न जाने कितने सवालों की आबरू रख ली।