sad शायरी क्या होती है? 

तलब करें तो मैं अपनी आँखें भी उन्हें दे दूँ,मगर ये लोग मेरी आँखों के ख्वाब माँगते हैं।

तलब करें तो मैं अपनी आँखें भी उन्हें दे दूँ,मगर ये लोग मेरी आँखों के ख्वाब माँगते हैं।

मेरे किस्से सर-ए-बाज़ार उछाले उसने, जिसका हर ऐब ज़माने से छुपाया मैंने।

नींद चुराने वाले पूछते हैं सोते क्यों नही, इतनी ही फिक्र है तो फिर हमारे होते क्यों नही।

कर के बेचैन मुझे फिर मेरा हाल ना पूछा, उसने नजरें फेर ली मैने भी सवाल ना पूछा !

हमारा कत्ल करने की उनकी साजीश तो देखो, गुजरे जब करीब से तो चेहरे से पर्दा हटा लिया।

फूल बनने की खुशी में मुस्कुरायी थी कली, क्या खबर थी ये तबस्सुम मौत का पैगाम है।

जिन जख्मो से खून नहीं निकलता समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है।